क्या अब एआई आधारित सेना की ज़रूरत?
भविष्य का युद्ध: ड्रोन, रोबोटिक्स और AI से लैस आधुनिक सैन्य शक्ति
आज का वैश्विक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। पारंपरिक युद्ध की अवधारणा अब साइबर हमलों, ड्रोन युद्ध, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्वचालित हथियार प्रणालियों तक विस्तृत हो चुकी है। रूस-यूक्रेन संघर्ष से लेकर पश्चिम एशिया में जारी तनाव तक, यह स्पष्ट हो चुका है कि भविष्य का युद्ध केवल सीमा पर सैनिकों की संख्या से नहीं, बल्कि तकनीकी श्रेष्ठता से जीता जाएगा। ऐसे समय में भारत के लिए यह आवश्यक हो गया है कि वह अपनी रक्षा तकनीक को नए युग के अनुरूप अपडेट करे।
भारत की तीनों सेनाएँ भारतीय थलसेना, नौसेना और वायुसेना पारंपरिक रूप से मजबूत रही हैं। परंतु अब चुनौती केवल सीमाओं की रक्षा तक सीमित नहीं है; साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष निगरानी और एआई-आधारित युद्ध प्रणाली जैसे क्षेत्र भी उतने ही महत्वपूर्ण हो गए हैं।
वैश्विक सैन्य एआई बाज़ार: तथ्य और आँकड़े
वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में सैन्य एआई क्षेत्र में निवेश की गति अत्यंत तीव्र है। नीचे दिए गए आँकड़े इस वास्तविकता को स्पष्ट करते हैं:
वैश्विक सैन्य एआई बाज़ार का आकार (2024): $9.31 बिलियन (लगभग ₹77,000 करोड़) (Grand View Research)
2025 तक अनुमानित बाज़ार: $10.79 बिलियन (Precedence Research)
2030 तक अनुमानित बाज़ार: $19.29 बिलियन (13% CAGR वृद्धि दर)
2035 तक अनुमानित बाज़ार: $35.57 बिलियन (2026-35 के बीच 12.67% CAGR)
अमेरिकी सैन्य एआई वार्षिक खर्च: लगभग $2 बिलियन प्रतिवर्ष (CIGI रिपोर्ट)
चीन का सैन्य एआई खर्च (2022 वृद्धि): 30% की बढ़ोतरी (रूस ने भी 2025 के लिए 30% बढ़ाया)
अमेरिकी रक्षा विभाग (DoD) का एआई आवंटन: $1.2 बिलियन (2022) (JAIC द्वारा 300 एआई सिस्टम तैनाती लक्ष्य)
वैश्विक सैन्य खर्च (2022): $2,240 बिलियन (SIPRI – 3.7% वृद्धि)
एशिया-प्रशांत क्षेत्र: सबसे तेज CAGR वृद्धि 2025-30 (भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया मुख्य)
उल्लेखनीय तथ्य यह है कि वैश्विक AI खर्च (सभी क्षेत्रों में) 2024 में $235 बिलियन था, जो 2028 तक $631 बिलियन तक पहुँचने का अनुमान है। इसका बड़ा हिस्सा रक्षा क्षेत्र में जा रहा है।
क्यों ज़रूरी है एआई आधारित सेना?
तेज निर्णय क्षमता – एआई आधारित सिस्टम सेकंडों में विशाल डेटा का विश्लेषण करते हैं। शोध बताते हैं कि एआई-संचालित कमांड सेंटर प्रतिक्रिया समय औसतन 30 सेकंड तक घटा देते हैं।
● ड्रोन और स्वायत्त हथियार , 2027 तक वैश्विक स्तर पर 8,000 एआई-संचालित स्वायत्त वाहन तैनात होने का अनुमान। सैन्य ड्रोन बाज़ार 2023-30 के बीच 18% CAGR से बढ़ रहा है।
● साइबर सुरक्षा – एआई-संचालित साइबर रक्षा प्रणालियाँ 60% अधिक साइबर हमलों को विफल करने में सक्षम पाई गई हैं। 2025 तक रक्षा साइबर सुरक्षा में एआई निवेश $4.5 बिलियन पहुँचने का अनुमान।
● सीमा निगरानी – एआई-संचालित निगरानी प्रणालियों ने वस्तु पहचान (object detection) की सटीकता 62% तक बेहतर की है।
● खतरा पहचान – एआई-आधारित थ्रेट डिटेक्शन सिस्टम 45% कम गलत अलर्ट देते हैं और रडार प्रणाली में 30% पहले चेतावनी देते हैं।
● भविष्य का अनुमान – 85% भावी सैन्य प्रणालियों में किसी न किसी स्तर पर एआई समावेश होगा।
भारत की स्थिति: बजट और प्रयास
भारत इस दिशा में कदम उठा रहा है, हालाँकि अभी और तेज़ गति की आवश्यकता है। रक्षा बजट के प्रमुख आँकड़े इस प्रकार हैं:
भारत का रक्षा बजट 2025-26: ₹6,81,210 करोड़ (लगभग $78 बिलियन) (सभी मंत्रालयों में सर्वाधिक – कुल बजट का 13.45%)
DRDO बजट 2025-26: ₹26,816 करोड़ (2024-25 से 12.41% अधिक)
पूँजीगत व्यय (Capital Outlay): ₹1,80,000 करोड़ (2024-25 से 4.65% अधिक)
iDEX + ADITI योजना आवंटन: ₹449.62 करोड़ (AI, साइबर, स्वायत्त हथियारों पर स्टार्टअप्स को अनुदान)
स्वदेशी खरीद का लक्ष्य: 75% पूँजीगत खरीद घरेलू उद्योग से (‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में)
iDEX से अब तक: 350+ अनुबंध (2018 से) (₹2,000 करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट स्वीकृत)
रक्षा खर्च जीडीपी अनुपात: 1.9% (GDP का) (2020 से लगातार घट रहा है – चिंता का विषय)
ध्यान देने योग्य बात यह है कि SIPRI की अप्रैल 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका, रूस, चीन, भारत और सऊदी अरब मिलकर 2022 में विश्व के 63% रक्षा खर्च के लिए जिम्मेदार थे।
वैश्विक तुलना: भारत बनाम प्रतिस्पर्धी
अमेरिका: वार्षिक सैन्य एआई खर्च $2 बिलियन + मानव रहित प्रणालियों पर $1.7-3.5 बिलियन। Pentagon के JAIC ने 2025 तक 300 एआई प्रणालियाँ तैनात करने का लक्ष्य रखा है।
चीन: 2024 में $1 बिलियन का एआई सैन्य बाज़ार। 2022 में 30% वृद्धि। स्वचालित निगरानी, ड्रोन झुंड (drone swarm) और साइबर युद्ध पर फोकस।
रूस: 2025 के लिए सैन्य खर्च में 30% वृद्धि अनुमोदित। पुतिन एआई को पश्चिम के विरुद्ध क्षमता अंतर पाटने का साधन मानते हैं।
NATO: 2021 में पहली एआई रणनीति अपनाई, 2024 में अपडेट किया गया।
भारत: iDEX, ADITI और DRDO के माध्यम से कदम उठाए जा रहे हैं, परंतु GDP का 1.9% खर्च तथा DRDO की धीमी गति चुनौती बनी हुई है।
नैतिक और रणनीतिक संतुलन
हालाँकि एआई आधारित सेना के साथ गंभीर नैतिक प्रश्न भी जुड़े हैं — क्या स्वचालित हथियारों को पूरी तरह मशीनों के भरोसे छोड़ देना उचित होगा? NATO ने 2024 में अपनी अद्यतन एआई रणनीति में ‘मानव नियंत्रण में स्वायत्तता’ को आवश्यक शर्त माना है। इसलिए भारत को तकनीकी प्रगति के साथ मानवीय निर्णय और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का संतुलन भी बनाए रखना होगा।
निष्कर्ष
वैश्विक एआई सैन्य बाज़ार 2024 के $9.31 बिलियन से बढ़कर 2035 तक $35.57 बिलियन हो जाएगा। इस दौड़ में भारत के लिए देर करना महंगा पड़ सकता है। भारत का रक्षा बजट ₹6.81 लाख करोड़ तक पहुँच चुका है, DRDO को 12.41% बजट वृद्धि मिली है और iDEX-ADITI योजना स्टार्टअप्स को एआई, साइबर व स्वायत्त तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है — ये सब सकारात्मक संकेत हैं।
परंतु GDP का मात्र 1.9% रक्षा पर खर्च, DRDO की सीमित क्षमता और घरेलू उद्योग की धीमी गति इस यात्रा में बाधाएँ हैं। भारत को अपनी सैन्य ताकत को केवल संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि गुणवत्ता और तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर पुनर्परिभाषित करना होगा।
देशी ललकार का मानना है — सशक्त भारत के लिए तकनीकी रूप से सक्षम सेना अब विकल्प नहीं, आवश्यकता है।
स्रोत: Grand View Research, Precedence Research, SIPRI, CIGI, PIB India, Stimson Center, Defence Guru | तिथि: मार्च 2026
