कौशल सिखाया, काम नहीं मिला: मध्य प्रदेश  के स्किल मिशन की हकीकत

मध्य प्रदेश सरकार पिछले कई वर्षों से बड़े-बड़े दावे कर रही है-लाखों युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देकर रोजगार योग्य बनाना, इंडस्ट्री से सीधा लिंकअप, और “आकांक्षी युवा” को आत्मनिर्भर बनाना। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY), मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना (MMKSY), और मध्य प्रदेश स्टेट स्किल डेवलपमेंट मिशन (MPSSDM) जैसी योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। लेकिन हकीकत क्या है? ट्रेनिंग तो बहुत हो रही है, पर जॉब प्लेसमेंट का आंकड़ा बेहद निराशाजनक। स्किल सिखाने के बाद अधिकांश युवा फिर से बेरोजगारों की कतार में खड़े नजर आते हैं। इंडस्ट्री से लिंक की कमी, टारगेट मिस, और फर्जी प्लेसमेंट के आरोप-ये सब मिलकर MP के स्किल मिशन की असल तस्वीर पेश करते हैं।

योजनाएं तो बहुत, लेकिन परिणाम कहां?

मध्य प्रदेश में स्किल डेवलपमेंट की कई बड़ी योजनाएं चल रही हैं:

  • PMKVY (प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना): केंद्र की फ्लैगशिप स्कीम, जिसे MP में बड़े पैमाने पर लागू किया गया।
  • मुख्यमंत्री कौशल संवर्धन योजना (MMKSY)/मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना: राज्य स्तर पर शॉर्ट-टर्म ट्रेनिंग और प्लेसमेंट का वादा।
  • MP स्टेट स्किल डेवलपमेंट एंड एम्प्लॉयमेंट जनरेशन बोर्ड: ITI, पॉलिटेक्निक और प्राइवेट ट्रेनिंग सेंटर्स के जरिए स्किलिंग।
  • रोजगार मेला और मेगा स्किलिंग ड्रीम: 2023-2025 में सरकार ने 1 लाख युवाओं को सालाना ट्रेन करने का टारगेट रखा था।

आंकड़े देखें तो ट्रेनिंग नंबर्स प्रभावशाली लगते हैं। 2023 में PMKVY के तहत MP ने देश में सबसे ज्यादा प्लेसमेंट का दावा किया था-करीब 30% से ज्यादा स्किल्ड कैंडिडेट्स को जॉब्स दी गईं। लेकिन नेशनल लेवल पर ही PMKVY की प्लेसमेंट रेट सिर्फ 43% रही (2024-2025 डेटा के अनुसार)। MP में भी हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि ट्रेनिंग के बाद जॉब रिटेंशन और क्वालिटी बेहद कम है।

2025 की एक रिपोर्ट (The Print) के मुताबिक, MP सरकार के मेगा स्किलिंग प्रोग्राम में सिर्फ 12% टारगेट ही पूरा हुआ-2 साल में 1 लाख सालाना की जगह बहुत कम युवाओं को ट्रेनिंग मिली। और जो ट्रेनिंग हुई, उसमें प्लेसमेंट फर्जीवाड़े के आरोप लगे: जॉब्स रिश्तेदारों को दी गईं, फ्रॉड कंपनियों ने कोटा पूरा किया, और रियल जॉब्स गायब।

स्किल ट्रेनिंग के बाद जॉब कितनी? आंकड़े खुद गवाही दे रहे

  • PMKVY डेटा (2023-2025): नेशनल लेवल पर 1.4 करोड़ से ज्यादा कैंडिडेट्स ट्रेन्ड हुए, लेकिन प्लेसमेंट सिर्फ 43%। MP में 2023 में अच्छा परफॉर्मेंस दिखाया गया (लगभग 1.5 लाख प्लेस्ड), लेकिन 2024-2025 में PMKVY 4.0 में फोकस प्लेसमेंट ट्रैकिंग से हटकर सिर्फ ट्रेनिंग पर शिफ्ट हो गया। रिजल्ट? सर्टिफाइड कैंडिडेट्स में से आधे से कम को स्थायी जॉब।
  • ITI और स्टेट स्किल प्रोग्राम्स: MP में ITI ग्रेजुएट्स की जॉब प्लेसमेंट रेट बहुत कम। एक पुरानी NSDC रिपोर्ट (2020 अपडेटेड) में MP में फॉर्मली ट्रेन्ड सिर्फ 5.17 लाख लोग थे, और ट्रेनिंग के बाद जॉब पाने वालों का प्रतिशत बेहद कम।
  • 2025 इंडिया स्किल्स रिपोर्ट: एम्प्लॉयेबिलिटी रेट इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स के लिए 71.5%, लेकिन MP जैसे राज्यों में स्किल मिसमैच की वजह से शिक्षित युवा बेरोजगार। MP में युवा बेरोजगारी रेट नेशनल एवरेज (14-15%) से प्रभावित, और स्किल्ड युथ भी लो-क्वालिटी या इनफॉर्मल जॉब्स में फंसे।
  • CAG रिपोर्ट (2025): PMKVY में कई कमियां-परफॉर्मेंस फिगर्स में गड़बड़ी, प्लेसमेंट डेटा अधूरा। MP में भी यही पैटर्न।

संक्षेप में: ट्रेनिंग तो लाखों में, लेकिन प्लेसमेंट 30-45% से ज्यादा नहीं। बाकी युवा फिर “आकांक्षी युवा” बनकर पोर्टल पर रजिस्टर हो जाते हैं-2025 में MP में 26-29 लाख रजिस्टर्ड बेरोजगार (अब आकांक्षी युवा कहलाते हैं)।

उद्योगों से लिंक क्यों नहीं? सबसे बड़ी कमी यही

स्किल डेवलपमेंट की सबसे बड़ी आलोचना यही है-ट्रेनिंग इंडस्ट्री की डिमांड से मैच नहीं करती।

  • इंडस्ट्री पार्टिसिपेशन की कमी: NITI Aayog और NSDC रिपोर्ट्स में साफ कहा गया कि MP में ITI और स्किल सेंटर्स में प्लेसमेंट सबसे बड़ा इश्यू। इंडस्ट्री पार्टिसिपेशन कम, इसलिए अप्रेंटिसशिप और ऑन-जॉब ट्रेनिंग नहीं हो पाती।
  • स्किल मिसमैच: युवाओं को पुरानी स्किल्स (जैसे बेसिक IT, रिटेल) सिखाई जाती हैं, लेकिन इंदौर-भोपाल के इंडस्ट्रीयल जोन्स में ऑटोमेशन, AI, और हाई-टेक स्किल्स की जरूरत। रिजल्ट? ट्रेन्ड युथ भी जॉब नहीं पाते।
  • प्राइवेट सेक्टर का कम इंटरेस्ट: 2020 कोविड के बाद प्रवासी मजदूरों के लिए स्किल प्लान फ्लॉप रहा, क्योंकि प्राइवेट प्लेयर्स ने रुचि नहीं दिखाई। 2025 में भी ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर पॉलिसी आई, लेकिन ग्राउंड लेवल पर इंडस्ट्री लिंकेज नहीं बना।
  • फर्जीवाड़े और मॉनिटरिंग की कमी: कई ट्रेनिंग सेंटर्स सिर्फ सर्टिफिकेट बांटते हैं, रियल स्किलिंग नहीं। प्लेसमेंट दिखाने के लिए फेक जॉब्स रिपोर्ट की जाती हैं।

प्रभाव और हकीकत

इस सबका नतीजा? MP की कार्यशक्ति में बाहरी राज्यों (यूपी-बिहार) के मजदूरों की पैठ बढ़ती जा रही, क्योंकि लोकल युथ स्किल्ड तो है, लेकिन जॉब-रेडी नहीं। शिक्षित बेरोजगारी बढ़ी, और युवाओं में निराशा। सरकार रोजगार मेले कराती है, लेकिन वे ज्यादातर शो-ऑफ साबित होते हैं-अस्थायी जॉब्स या कोई गारंटी नहीं।

निष्कर्ष: सिर्फ आंकड़े नहीं, रियल रिजल्ट चाहिए

MP का स्किल मिशन आंकड़ों में तो चमकता है-लाखों ट्रेन्ड, करोड़ों खर्च। लेकिन असल सवाल यही है: ट्रेनिंग के बाद जॉब क्यों नहीं? इंडस्ट्री से मजबूत लिंक, डिमांड-बेस्ड कोर्सेज, और सख्त मॉनिटरिंग के बिना ये योजनाएं सिर्फ कागजी शेर बनी रहेंगी। युवाओं को कौशल नहीं, स्थायी रोजगार चाहिए। सरकार को अब आंकड़ों से आगे सोचना होगा-नहीं तो “आकांक्षी युवा” हमेशा आकांक्षा ही करते रहेंगे।

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