श्रेणी: फ़ैक्ट चेक | अर्थव्यवस्था | समाज
तारीख: फ़रवरी 2026
वैश्विक निवेश शिखर सम्मेलन (जीआईएस) 2025 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि “मध्यप्रदेश अब बिमारू राज्य नहीं रहा।” वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर, निवेश समझौतों और औद्योगिक विकास को राज्य की प्रगति का प्रमाण बताते रहे हैं।
सरकारी दावों के अनुसार मध्यप्रदेश तेज़ विकास के मार्ग पर है। किंतु जब रोजगार संबंधी आधिकारिक आँकड़ों — विशेषकर सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) तथा सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी (सीएमआईई) — का विश्लेषण किया जाता है, तो रोजगार की तस्वीर कहीं अधिक जटिल और आंशिक रूप से विरोधाभासी दिखाई देती है।
1. मध्यप्रदेश में बेरोज़गारी: आधिकारिक आँकड़े क्या कहते हैं?
पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार:
| मानक | मध्यप्रदेश | राष्ट्रीय औसत | स्थिति |
|---|---|---|---|
| कुल बेरोज़गारी दर | लगभग 1.5 प्रतिशत | 4.7 प्रतिशत | मध्यप्रदेश बेहतर |
| युवा बेरोज़गारी (15–29 वर्ष) | 3.2 प्रतिशत | 18.5 प्रतिशत | मध्यप्रदेश बेहतर |
| शहरी बेरोज़गारी | ग्रामीण से अधिक | 14.7 प्रतिशत (राष्ट्रीय शहरी) | ग्रामीण-शहरी अंतर स्पष्ट |
| महिला श्रम भागीदारी दर | लगभग 25–30 प्रतिशत | 40.3 प्रतिशत | मध्यप्रदेश पीछे |
| शिक्षा-बेरोज़गारी असंगति | शहरों में अधिक | राष्ट्रीय स्तर पर भी | संरचनात्मक समस्या |
प्रथम दृष्टया 1.5 प्रतिशत की बेरोज़गारी दर अत्यंत सकारात्मक प्रतीत होती है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है।
लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण तथ्य है — कम बेरोज़गारी दर का अर्थ हमेशा गुणवत्तापूर्ण रोजगार नहीं होता।
2. छिपी बेरोज़गारी: कम दर की वास्तविकता
मध्यप्रदेश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है। ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग कृषि कार्य में संलग्न हैं, परंतु उनकी सीमांत उत्पादकता अत्यंत कम है।
अर्थशास्त्र में इसे “छिपी बेरोज़गारी” कहा जाता है —
अर्थात व्यक्ति कार्यरत है, पर उसकी उत्पादकता लगभग शून्य है।
पीएलएफएस की कम बेरोज़गारी दर इस वास्तविकता को पूर्ण रूप से प्रदर्शित नहीं करती।
3. जीआईएस 2025 और 1.73 लाख नौकरियों का दावा
राज्य सरकार का दावा है कि जीआईएस 2025 के माध्यम से 1.73 लाख नई नौकरियाँ सृजित होंगी।
परंतु महत्वपूर्ण प्रश्न यह है:
- क्या समझौता ज्ञापनों से वास्तविक रोजगार सृजन की निगरानी के लिए कोई आधिकारिक तंत्र उपलब्ध है?
- क्या पूर्व निवेश सम्मेलनों के अनुभव लक्ष्य के अनुरूप रहे हैं?
उपलब्ध ऐतिहासिक आँकड़ों (2007–2016) के अनुसार निवेश सम्मेलनों से प्रतिवर्ष औसतन लगभग 17,600 नौकरियाँ सृजित हुईं, जो घोषित लक्ष्यों से काफी कम थीं।
इसलिए 1.73 लाख नौकरियों के दावे की विश्वसनीयता पारदर्शी निगरानी व्यवस्था के अभाव में संदिग्ध बनी रहती है।
4. युवा बेरोज़गारी: असली चुनौती
सीएमआईई के अनुसार 2022–23 में भारत में 15–24 आयु वर्ग की बेरोज़गारी दर 45.4 प्रतिशत थी, जो समग्र राष्ट्रीय बेरोज़गारी दर (7.5 प्रतिशत) से लगभग छह गुना अधिक है।
मध्यप्रदेश के शहरी क्षेत्रों में उच्च शिक्षित युवाओं के सामने विशेष चुनौतियाँ हैं:
- उच्च कौशल आधारित नौकरियों की कमी
- प्रतियोगी परीक्षाओं में लंबी प्रतीक्षा अवधि
- योग्यता से कम स्तर के कार्य स्वीकार करना
- अन्य राज्यों की ओर पलायन
यह स्थिति अधूरा रोजगार (अंडरएम्प्लॉयमेंट) की समस्या को दर्शाती है।
5. महिला श्रम भागीदारी: अधूरा विकास
पीएलएफएस 2023-24 के अनुसार राष्ट्रीय महिला श्रम बल भागीदारी दर 40.3 प्रतिशत है।
मध्यप्रदेश में यह दर लगभग 25–30 प्रतिशत के बीच है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में स्थिति और भी कमज़ोर है।
यद्यपि स्वयं सहायता समूहों की संख्या देश में 1.2 करोड़ से अधिक है और मध्यप्रदेश में भी इनकी सक्रिय उपस्थिति है, फिर भी:
- नियमित आय की स्थिरता का अभाव
- स्वरोज़गार की सीमित वृद्धि
- आर्थिक स्वायत्तता में धीमी प्रगति
ये संकेत करते हैं कि केवल भागीदारी पर्याप्त नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और स्थायी रोजगार आवश्यक है।
निष्कर्षतः:
“बिमारू से विकसित” का दावा सकल घरेलू उत्पाद के आँकड़ों में दिखाई दे सकता है, परंतु गुणवत्तापूर्ण रोजगार, कौशल आधारित अवसर और महिला आर्थिक सशक्तिकरण के संदर्भ में स्थिति अभी संतोषजनक नहीं कही जा सकती।
वास्तविक विकास का मानदंड निवेश घोषणाएँ नहीं, बल्कि स्थायी, सम्मानजनक और उत्पादक रोजगार होना चाहिए।
| फ़ैक्ट चेक निष्कर्ष: MP की official unemployment rate कम है — यह आंशिक रूप से सच है। लेकिन low rate disguised unemployment और agricultural over-dependence को नहीं दर्शाती। GIS की 1.73 लाख job promise का कोई verification mechanism नहीं है। Women’s LFPR अभी भी कम है। ‘BIMARU से विकसित’ का दावा GDP में तो दिख सकता है, लेकिन quality employment में नहीं। |
संदर्भ सूची
1. MoSPI — PLFS Annual Report 2023-24: https://mospi.gov.in/periodic-labour-force-survey-plfs
2. India Macro Indicators — Unemployment 2025: https://indiamacroindicators.co.in/resources/blogs/indias-unemployment-rate-in-2025
3. CMIE — Youth Unemployment (2022-23): https://www.cmie.com/kommon/bin/sr.php?kall=warticle&dt=20230926184023
4. StudyIQ — State-wise Unemployment Data: https://www.studyiq.com/articles/unemployment-rate-in-india/
