मक्का किसानों का रोना: बीजेपी सरकार में लागत भी नहीं निकल रही, आय दोगुनी का वादा खोखला

  • मध्य प्रदेश भारत के प्रमुख मक्का उत्पादक राज्यों में से एक है। राज्य में लगभग 8-10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में मक्का की खेती होती है, जिसमें मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और विंध्य क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से शामिल हैं। 2014 में केंद्र की बीजेपी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था, जिसे 2024 तक बढ़ाया गया। हालांकि, जमीनी हकीकत यह है कि मक्का किसानों को उनकी उत्पादन लागत भी नहीं मिल पा रही है।
  • केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2023-24 में ₹2,090 प्रति क्विंटल और 2024-25 में ₹2,225 प्रति क्विंटल तय किया गया। लेकिन मध्य प्रदेश में सरकारी खरीद तंत्र की कमजोरी और निजी व्यापारियों के शोषणकारी रवैये के कारण किसानों को ₹1,400-₹1,700 प्रति क्विंटल तक मक्का बेचने पर मजबूर होना पड़ रहा है। यह MSP से 20-30% कम है।

MSP बनाम वास्तविक बाजार मूल्य (2018-2024)

वर्षMSP (₹/क्विंटल)औसत बाजार मूल्य MP (₹/क्विंटल)किसान को प्राप्त मूल्य (₹/क्विंटल)अंतर (%)
2018-191,7001,450-1,6001,400-1,550-14 से -18%
2019-201,7601,500-1,6501,450-1,600-17 से -18%
2020-211,8501,600-1,7501,550-1,700-16 से -19%
2021-221,8701,650-1,8001,600-1,750-14 से -17%
2022-231,9621,700-1,8501,650-1,800-15 से -18%
2023-242,0901,750-1,9001,700-1,850-18 से -22%
2024-252,2251,800-2,0001,750-1,950-12 से -21%

उत्पादन लागत विश्लेषण (2024-25)

लागत मदमूल्य (₹/क्विंटल)
बीज280-320
खाद-उर्वरक450-550
कीटनाशक180-220
सिंचाई200-250
मजदूरी (बुआई से कटाई)500-600
भूमि किराया/लागत150-200
अन्य खर्च100-150
कुल औसत लागत₹1,860-₹2,290

किसानों को MSP से 12-22% कम मूल्य मिल रहा है, जो उनकी उत्पादन लागत से भी कम है।

आकड़े क्या संकेत देते हैं:

  1. MSP केवल कागजी घोषणा: सरकार MSP तो घोषित करती है, लेकिन खरीद तंत्र इतना कमजोर है कि 95% किसान इसका लाभ नहीं ले पाते।
  2. लागत-आय का विरोधाभास: उत्पादन लागत ₹1,860-₹2,290 है, MSP ₹2,225 है, लेकिन किसान को ₹1,700-₹1,950 ही मिल रहा है। यानी 200-500 रुपये प्रति क्विंटल का घाटा
  3. निजी व्यापारियों का एकाधिकार: सरकारी खरीद केंद्रों की कमी के कारण किसान मजबूरन निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेचते हैं।
  4. ‘आय दोगुनी’ का खोखला दावा: 2016-17 में औसत किसान आय ₹96,703 थी, जो 2022-23 में ₹1,27,768 हुई (31% वृद्धि)। लेकिन महंगाई और लागत में 40-50% वृद्धि को देखें तो वास्तविक आय घटी है।

नीति और समाज पर प्रभाव:

  • किसान कर्ज में डूबे: NABARD के अनुसार MP में 62% कृषक परिवार कर्जदार हैं।
  • पलायन बढ़ा: युवा किसान खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं।
  • खाद्य सुरक्षा का खतरा: मक्का पोल्ट्री फीड और स्टार्च उद्योग के लिए महत्वपूर्ण है। कम उत्पादन इन क्षेत्रों को प्रभावित करेगा।

लाभार्थी बनाम प्रभावित वर्ग:

  • लाभार्थी: मध्यस्थ व्यापारी, पोल्ट्री उद्योग (सस्ता मक्का), बड़े किसान (भंडारण क्षमता वाले)
  • प्रभावित: छोटे और सीमांत किसान (85% कृषक), खेतिहर मजदूर, ग्रामीण अर्थव्यवस्था

सरकार से पूछे जाने वाले अहम सवाल:

  1. जब MSP ₹2,225 है, तो किसानों को ₹1,700-₹1,950 क्यों मिल रहा है?
  2. कुल उत्पादन का केवल 4-6% MSP पर खरीदा जाता है, बाकी 95% किसानों के लिए क्या व्यवस्था है?
  3. ‘किसान आय दोगुनी’ का लक्ष्य 2014 में घोषित हुआ, 10 साल बाद भी किसान लागत नहीं निकाल पा रहे — जवाबदेही किसकी?
  4. मध्य प्रदेश में खरीद केंद्रों की संख्या कितनी है? क्यों हर तहसील में व्यवस्था नहीं?
  5. MSP पर खरीद केंद्रों में भ्रष्टाचार, दलाली और तौल में धांधली की शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई?
  6. उत्पादन लागत ₹2,200 तक पहुंच गई है, तो MSP इससे कम क्यों तय की गई?
  7. किसान कर्ज और आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़ों पर सरकार का क्या ठोस कदम है?

मध्य प्रदेश में मक्का किसानों की हालत सरकार की नीतिगत विफलता और क्रियान्वयन में लापरवाही का प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक तरफ बीजेपी सरकार ‘किसान आय दोगुनी’ का नारा दे रही है, दूसरी तरफ किसानों को अपनी उत्पादन लागत भी नहीं मिल पा रही। MSP की घोषणा महज एक राजनीतिक तमाशा बनकर रह गई है, क्योंकि 95% किसानों तक इसका लाभ पहुंच ही नहीं रहा।

जनहित पर प्रभाव:

  • आर्थिक संकट: किसानों का बढ़ता कर्ज ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तबाह कर रहा है।
  • सामाजिक असंतोष: युवाओं का पलायन, आत्महत्याओं में वृद्धि।
  • खाद्य सुरक्षा का खतरा: मक्का उत्पादन में गिरावट भविष्य में पोल्ट्री और डेयरी उद्योग को प्रभावित करेगी।

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